शुभकामनाएं लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
शुभकामनाएं लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, 31 दिसंबर 2011

मेरे और मेरे  सहयोगियों की ओर से पूरे विश्व के लोगों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

गुरुवार, 1 सितंबर 2011

गणेश चतुर्थी

देश-विदेशों में बसे सभी गणेश भक्तों को मेरे और मेरे साथियों की ओर से बहुत-बहुत शुभाकामनाएँ। बुद्धि के देवता गजानन से मैं यही प्रर्थना करता हूँ कि हे प्रभू! आप पथ-भ्रष्ट विश्व को सद्मार्ग दिखाओ। आज पूरा विश्व आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक और आतंकवादी समस्याओं से ग्रस्त है। देव-भूमि भारत भी आज इससे मुक्त नहीं है। अतः हे विघ्न्हर्ता, मंगलकर्ता, भक्त-वत्सल, सिद्धि-विनायक भगवान श्री गणेश! आप हीं अपनी कृपा-वृष्टी(वर्षा) से मानव-जाति में सत्य, अहिंसा, दया, करुणा और प्रेम की गंगा को सुखने से बचा सकते हो। हे प्रभू! आपकी असीम कृपा की ज़रुरत है इसलिए कभी रुष्ट न होना।
जै श्री गणेश!
                                                             

ईद की हार्दिक शुभकामनाएँ

विश्व के कोने-कोने में बसे सम्पुर्ण मुसलमान भाईयों और बहनों को मेरे और मेरे साथियों की ओर से ईद की ढेर सारी शुभकामनाएँ। मैं यही कामना करता हूँ कि रमज़ान का महिना और ईद का महान पर्व जिसप्रकार पवित्रता और ख़ुशियों से लोगों को परिपूर्ण कर देता है, उसीप्रकार यह पर्व लोगों के जीवन में प्रेम, सद्भाव, शाँति, सफलता, समृद्धि एवं विश्वास और दया का भाव उत्पन्न करें। मैं ऊपर वाले से यही प्रार्थना करता हूँ  कि हे, पर्वरदिगार! सबको सद्बुद्धि दे और अपने संतानों पर सदा अपनी कृपा बनाए रखना।

ईद मुबारक!
                                                                               

मंगलवार, 23 अगस्त 2011

श्री कृष्ण-जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ


श्री कृष्ण-जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर पूरे विश्व में बस रहे भारतवासियों को मेरे और मेरे सहयोगियों द्वारा ढेर सारी शुभकामनाएँ। मैं आज भगवान श्री कृष्ण से प्रर्थना करता हूँ  कि हे! प्रभु, सभी को सद्बुद्धी दें कि भारत में उत्पन्न भ्रष्टाचार से सम्बन्धित मुद्दा शाँतिपूर्ण तरिके से हल हो जाये क्योंकि मुझे संदेह है कि गाँधीवाद की आड़ में अन्ना टीम पुरे संसदीय व्यवस्था को हीं न समाप्त कर दे। कहीं हमारा संविधान अपना मूल रुप न खो दे। मुझे प्रतीत होता है कि J.P. आंदोलन के नक्शे कदम पर चलते हुए अन्ना टीम भारत में माओवाद या लेनिनवाद के समान अन्नावाद बनाकर पूरे सत्ता पर काविज़ न हो जाए क्योंकि हमारे देश की अधिकांश जनता संविधान की बारीकियों को नहीं समझती हैं। वे भ्रष्टाचार से त्रस्त हैं। ऐसे में वें कोई भी स्वार्थी या निःस्वार्थी तत्वों का साथ दे सकती हैं इसलिए भगवान श्री कृष्ण से मैं पुनः प्रार्थना करता हुं कि हे! प्रभु, द्रौपदी की लाज के समान मेरे शहिदों और महापुरुषों द्वारा बनाए गए संविधान की रक्षा करना और विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र को अपने स्वभाविक रुप में बनाए रखना।
जय, श्री कृष्ण!
[तस्वीरें,- गूगल के साभार]

सोमवार, 15 अगस्त 2011

आज़ादी की 65 वीं वर्षगांठ

     मैं अपने और अपने सहयोगियों की ओर से सम्पूर्ण भारतवासियों और विदेशो में बसे भारतीय मूल के निवासियों के साथ-साथ सैकड़ो वर्षो से बिछड़ चूके भारतवंशियों को भारत की आज़ादी के 65 वें वर्षगांठ पर बहुत-बहुत बधाइयाँ देता हूँ और ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि यह आजादी हमेशा बनी रहे और भारतवासी विश्व  के कोई भी कोने में हो ईश्वर उन्हें सुख, शांति, समृद्धि और राष्ट्र-प्रेम की भावना जागृत करें.
                                                                    आज मुझे अत्यंत खुशी है और गर्व का अनुभव हो रहा है कि जिस आज़ादी रुपी दुल्हनियाँ का आगमन 15 अगस्त 1947 को हुआ था, वह आज धन-धान्य, सुख-शान्ति, समृद्धि और सौभाग्य से युक्त होकर अपनी उम्र के 65वें वसन्त तक पहुँच चूकी हैं। इन 65 वर्षों में कई बार इसकी स्मिता और आबरु पर कभी घर के हीं लोगों ने डाका डाला तो कभी विदेशी शक्तियों और पड़ोंसियों ने अपने नापाक इरादे से आक्रमण किया। फिर भी गाँधी के त्यागों और अनगिनत शहिदों के रक्त से सिंचित हमारी मातृभूमि अपनी अखण्डता और अक्षुण्ता को बनाए रखी है।
                                                                    अत: हमारा सविनय आग्रह उन सभी भाई-बहनों से जिन्होंने कुछ सैद्धांतिक और आपसी मतभेदों के कारण हमारे समाज के मुख्य धारा से अलग हो गये हैं, उन्हें मैं पुनः मुख्य धारा में शामिल होकर इस मातृभूमि की आज़ादी और शहिदों के बलिदानों की लाज बचाने केलिए आमंत्रित करता हूँ, क्योंकि मुझे ऐसा लग रहा है कि कुछ स्वार्थी तत्व भारत के लोकतांत्रिक और संसदीय व्यवस्था को हानि पहुँचा सकते हैं। अतः आज के इन विषम परिस्थितियों में सभी मातृभूमि के संतानों का एकजूट होकर विश्व की सबसे बड़ी प्रजातंत्र की रक्षा करने की आवश्यकता है। भारत का संविधान विश्व का एक आदर्श संविधान है, इसलिए हमें संसदीय प्रणाली आम चूनाव और आम सहमति से भ्रष्टाचार से लेकर लोकपाल विधेयक जैसे समस्त मुद्दों का हल निकालना चाहिए। हमें जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों, विद्वानों, विश्लेषकों तथा स्वविवेक और धैर्य से काम लेना चाहिए, क्योंकि जल्दबाज़ी में उठाये गये कदम किसी भी दॄष्टी से उचित एवं न्याय-संगत नहीं माना जा सकता। जैसा कि रामायण में [भगवान श्रीराम ने लक्ष्मण को] लक्ष्मण भरत और उनके साथ आ रही सेना को देखकर यह अनुमान लगा लिया कि भरत हमारे  [राम,लक्ष्मण और सीता के] ऊपर आक्रमण करने आ रहें हैं। ऐसे में लक्ष्मण ने अपने प्रभु श्रीराम की जान की सुरक्षा केलिए चिंतित होकर भरत को हीं मारने केलिए धनुष तान दी और श्रीराम की एक भी बात सूनने को तैयार नहीं हुए तो श्रीराम ने कहा_
                     "लक्ष्मण! कभी-कभी आँख से देखा और कान से सूना भी गलत होत है।" और आख़िर हुआ भी यही कि भरत राम को वापस अयोध्या वापस ले जाना चाहते थें।
                                                                   शायद कहीं यही हाल हमारे साथ न हो जाए, कि जिसे हम अपना दूसरा गाँधी शिवाजी और भगत सिंह मान रहें हैं, वह कुछ और न निकल जाएं। इसलिए हमें सोच-समझ्कर केवल संवैधानिक और प्रजातांत्रिक तरिकों से हीं सरकार को भ्रष्टाचार और लोकपाल केलिए मज़बूर करनी चाहिए। मेरा निज़ी विचार है कि सरकार को अपने प्रस्ताव के साथ सिविल सोसायटी, विपक्ष, पत्रकारों, विद्वानों और विश्लेषकों के प्रस्ताव को एकसाथ विभिन्न बिन्दुओं में छ्पवाकर उसपर आम मतदान कराये जाएं और फिर संसद पर रखकर उसके मुख्य बिन्दुओं पर चर्चा करवाकर एक सर्वमान्य कानून का रुप दिया जाना चाहिए। मेरा मानना है कि कोई भी कानून संसद के अन्दर हीं बनना चाहिए तभी लोकतांत्रिक व्यवस्था बनी रहेगी अन्यथा हम अपने समृद्ध लोकतंत्र को खो सकते हैं।
जय हिंद! 
                                                                       

                                                                                                                                     [तस्वीरें,- गूगल के साभार]               









                                                                                                          
                                                                                                 

शुक्रवार, 22 अप्रैल 2011

HAPPY GOOD-FRIDEY






         विश्व के प्रत्येक कोने में रहने वाले ईसाई भाइयों एवं बहनों को गुड-फ्राइडे का बहुत-बहुत बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ और कामना करता हूँ की प्रभु ईसा सबके ह्रदय में दया और प्रेम की भाव जगाएं. आधुनिक संसार में सबसे बड़ी समस्या मानवता का पतन और करूणा का अभाव है. इसलिए दयामूर्ति ईसा-मसीह से मैं यही प्रार्थना करता हूँ कि हे प्रभु ! तुम जन-जन के मन में प्रेम, दया, बंधुत्व और अपनत्व का भाव उत्पन्न करो और अपने आशीर्वाद से सूर्य के समान लोगों के ह्रदय में सत्य, ज्ञान और प्रेम का प्रकाश प्रज्वलित करो !

गुरुवार, 14 अप्रैल 2011

14 अप्रैल की हार्दिक शुभकामनाएं !

NMCI और उसके पूरे टीम सदस्यों की ओर से भारत तथा पुरे विश्व को बोहाग बिहू, बैसाखी, विशू, महाविशुआ संक्रांति, पुथानदू, तुलुवा, जुड़िशीतल, संगराय, बिजू, थिंग्यान, खमेर, संगकान, अलुथ अवरुधू, सांगकर्न की हार्दिक शुभकामनाएं !

मंगलवार, 12 अप्रैल 2011

रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएं !

सभी भारतीय एवं विश्व के भाई-बहनों को रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएं एवं स्नेह. आज का पावन दिन हमें राम के व्यक्तित्व एवं उनके चरित्र से कुछ सिखने के लिए प्रेरित करता है. आज के भाग-दौड़, स्वार्थी एवं व्यक्तिवादी जीवन-शैली में राम के आदर्शों का पुरे मानव-जाति को अपनाने की आवश्यकता है. आधुनिक जीवन-शैली में जहाँ पुरुष अपना धर्म, कर्त्तव्य, मर्यादा एवं उच्च आदर्शों के साथ अपने पुरुषार्थ को खोता चला जा रहा है वहीं महिलाएं अपनी त्याग एवं ममता रूपी छवि नष्ट करने लगीं हैं. प्रत्येक व्यक्ति आज केवल अपने स्वार्थ और आर्थिक लाभ की चिंता करने लगा है. लोग केवल सत्ता-प्राप्ति और झूठे प्रसिद्धि प्राप्त करने के लिए गांधीवादी और जनवादी बनने का स्वांग रच रहें हैं जो किसी भी दृष्टि से राष्ट्र व मानव हित में नहीं है. अतः आज आवश्यकता है,- श्रीराम को अपने जीवन में आत्मसात करने की.
                                                                                      जय  श्रीराम !

शनिवार, 2 अप्रैल 2011

क्रिकेट: विश्वकप 2011

         विश्वकप २०११ के जीत पर मेरे और मेरे सहयोगियों द्वारा एम.एस.धोनी और उनके टीम के सदस्यों तथा भारतीय समर्थकों को ढेर सारी बधाइयाँ देता हूँ. और आशा करता हूँ कि वें ऐसे हीं भारत की झोलियों में हमेशा कप दिलाते रहें तथा भारत के मान-सम्मान में वृद्धि करते रहें.

                                                                                                          जय हिंद !


रविवार, 20 मार्च 2011

HAPPY HOLI

   सभी भारतवासियों, प्रवाशी- भारतीयों  और भारतीय संस्कृति  के प्रति आस्था रखने वाले  विदेशी भाई-बहनों को मेरे एवं मेरे सहयोगियों की ओर से होली की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई. रंगों का यह महापर्व हमें बड़े, बुजुर्ग, बच्चें तथा स्त्री -पुरुष के भेदभाव को दूर कर एक रंग प्रदान करता है. यह पर्व हम सभी को गुलाल और कृत्रिम रंग में  रंग देता है. जो इस भावना का प्रतीक है की पृथ्वी पर न तो कोई गोरा है न कोई काला, सभी किसी बगीचे के फूल के समान है. जो अलग-अलग रंगों में उपस्थित हो कर प्रकृति की सुन्दरता में चार-चाँद लगाते हैं. यदि पृथ्वी रूपी बगीया में अलग-अलग रंग न होता तो शायद इस पृथ्वी की सुन्दरता वो न होती जो आज है. हमारे देश में होली का पर्व इसी भावना से प्रेरित हो कर मनाया जाता है. होली में जाति निरपेक्षता तथा  धर्मनिरपेक्षता की भावना होती है. शायद होली हीं एक ऐसा पर्व है जो जाति, धर्म, मुल्क  और रंग-भेद से मुक्त हो कर मनाया जाता है. इस दिन न तो कोई राजा होता है और न कोई भिखारी. आज के दिन सभी एक साथ मिल कर रंग खेलते हैं. हर घर के लोग इस पर्व में शामिल हो कर हुर्दंग मचाते  हैं और एक दुसरे को छेड़ते और उनके साथ हंसी-मजाक किया करते हैं. संक्षेप में कहे तो, समाज और मानवता को जोड़ने के साथ-साथ यह पर्व नए -पुराने पीढ़ियों को खुल कर अपनी भावना व्यक्त करने एवं एक-दुसरे को समझने का अवसर देता  है, एक अर्थ में यह पर्व janreshan-gaip की आधुनिक समस्या को दूर करने में भी सार्थक है. इसलिए मैं इस पर्व को विश्व का सबसे बड़ा और महान पर्व मानता हूँ. यदि इस पर्व को पूरी दुनियां मनायें तो शायद रंग-भेद, janreshan-gaip और एक-दुसरे के प्रति नफरत जैसी समस्याएँ स्वयं समाप्त हो जाएगी.  
                         
                                                        आशा है की आज आप भी होली का महापर्व अवश्य celebrate करेंगें परन्तु इस होली की खुशियाँ और कई गुणा होती यदि जापान में प्राकृतिक आपदा न आता. पर प्रकृति के सामने हम सभी लाचार और बेबश हैं और ईश्वर से यही प्रार्थना करते हैं कि " हे प्रभु ! जो इस दुनियां में नहीं हैं , उनकी आत्मा को शांति दे और वहां के लोगो के जीवन को सामान्य बनाने की कृपा करें. " अंत में  जापान और वहां के नागरिकों के लिए यही कहूँगा " live long japan !"
                                        
                                                  Happy Holi !